लोकसभा सीट कितनी है 2022:-
वर्तमान में लोकसभा में 545 सीट हैं। लोकसभा में अधिकतम निर्वाचित सीटों की संख्या 552 हो सकती हैं। क्योंकि P.O.K वाले क्षेत्र एवं अक्षायी चीन वाले क्षेत्र में चुनाव नहीं होते हैं इसलिए 7 सीटों पर मतदान नहीं होता इसलिए उन्हें खाली छोड़ दी जाती हैं भविष्य में P.O.K व अक्षायी चीन को भारत में वापस मिलने के बाद इन पर भी चुनाव होंगे।
लोकसभा सीट कितनी है?
वर्तमान में लोकसभा में 545 सीट हैं। लोकसभा में अधिकतम निर्वाचित सीटों की संख्या 552 हो सकती हैं। क्योंकि P.O.K वाले क्षेत्र एवं अक्षायी चीन वाले क्षेत्र में चुनाव नहीं होते हैं इसलिए 7 सीटों पर मतदान नहीं होता इसलिए उन्हें खाली छोड़ दी जाती हैं भविष्य में P.O.K व अक्षायी चीन को भारत में वापस मिलने के बाद इन पर भी चुनाव होंगे।
लोकसभा अध्यक्ष:-
वर्तमान में लोकसभा अध्यक्ष श्रीमान ओम बिरला है जो राजस्थान के कोटा राज्य से सांसद हैं।
वर्तमान में लोकसभा अध्यक्ष कौन हैं?
वर्तमान में लोकसभा अध्यक्ष श्रीमान ओम बिरला है जो राजस्थान के कोटा राज्य से सांसद हैं।
लोकसभा तथा राज्यसभा में अंतर:-
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| लोकसभा सीट कितनी है 2022 |
1) लोकसभा का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 81 में हैं जबकि राज्यसभा का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 80 में है।
2) लोकसभा अस्थाई सदन है जिसे अनुच्छेद 85 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा भंग किया जा सकता है जबकि राज्यसभा स्थाई सदन है जो निरंतर चलता रहता है बंद नहीं किया जा सकता है।
नंबर 3 लोकसभा निम्न सदन है किंतु लोकप्रिय अधिक है जबकि राज्यसभा उच्च है किंतु लोकप्रिय कम है।
नंबर 4 लोकसभा सदस्यों की आयु न्यूनतम 25 वर्ष होती है जबकि राज्यसभा के सदस्यों की न्यूनतम आयु 30 वर्ष होती है ।
नंबर 5 लोकसभा के सदस्यों की संख्या में वृद्धि या कमी का अधिकार संसद को है वर्ष 1971 की जनगणना के अनुसार 2026 तक अपरिवर्तनीय है और इसी प्रकार राज्यसभा का के सदस्यों की संख्या में वृद्धि या कमी का अधिकार भी संसद को ही है।
नंबर 6 लोकसभा में मतदान प्रणाली प्रत्यक्ष रूप से होती है जबकि राज्यसभा में मतदान प्रणाली अप्रत्यक्ष तौर पर राज्यों की विधानसभाओं के द्वारा होती है।
नंबर 7 लोकसभा सदस्य एक साथ सेवानिवृत्त होते हैं। जबकि राज्यसभा के सदस्य प्रति 2 वर्ष बाद एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं।
नंबर 8 लोकसभा के सदस्यों को शपथ लोकसभा अध्यक्ष या कार्यवाहक अध्यक्ष दिलाता है जबकि राज्यसभा के सदस्यों को शपथ उपराष्ट्रपति या सभापति द्वारा दिलाई जाती है।
नंबर 9 लोकसभा के सदस्य अपना त्यागपत्र लोकसभा अध्यक्ष को देते हैं जबकि राज्यसभा के सदस्य अपना त्यागपत्र सभापति को देते हैं।
नंबर 10 आपातकाल के समय इस के कार्यकाल को 1 वर्ष क अधिकतम बढ़ाया जा सकता है जबकि राज्यसभा का कार्यकाल निरंतर चलता रहता है।
नंबर 11 लोकसभा 500000 की जनसंख्या पर एक सदस्य निर्वाचित होता है जबकि राज्यसभा ने 10 लाख की जनसंख्या पर एक सदस्य नेतृत्व करता है।
नंबर 12 लोकसभा निर्वाचित सदस्यों की संख्या 546 होती है जबकि राज्यसभा के सदस्यों की निर्वाचित संख्या 233 होती है।
नंबर 13 लोकसभा में मनोनीत सदस्यों की संख्या दो होती है जो anglo-indians होते हैं। जबकि राज्यसभा में मनोनीत सदस्यों की संख्या 12 होती है जो विभिन्न क्षेत्रों में पारंगत हो जैसे कला संस्कृति साहित्य इत्यादि।
लोकसभा में कुल सदस्यों की संख्या 543 + 2 होती है जबकि राज्यसभा में कुल सदस्यों की संख्या 233 प्लस 12 इज इक्वल टू 245 होती है।
नंबर 15 लोकसभा में अधिकतम निर्वाचित सदस्यों की संख्या 552 हो सकती है जबकि राज्यसभा में अधिकतम निर्वाचित सदस्यों की संख्या 250 हो सकती हैं।
नंबर 16 राजस्थान से लोकसभा में सदस्यों की संख्या 25 है जबकि राज्यसभा में राज्य सभा के सदस्यों की संख्या 10 है।
नंबर 17 प्रांतों से निर्वाचित होने वाले सदस्यों की संख्या 530 है जबकि राज्यसभा में प्रांतों से निर्वाचित होने वाले सदस्यों की संख्या 229 है।
नंबर अट्ठारह केंद्र शासित प्रदेशों से निर्वाचित होने वाले सदस्यों की संख्या 20 है जबकि राज्यसभा में केंद्र शासित प्रदेशों से निर्वाचित होने वाले सदस्यों की संख्या 9 है।
नंबर 19 प्रांतों से अधिकतम निर्वाचित सदस्यों की संख्या 530 है जबकि राज्यसभा में प्रांतों से अधिकतम निर्वाचित सदस्यों की संख्या 234 है।
नंबर 20 सर्वाधिक निर्वाचित सदस्यों की संख्या 80 यूपी से है जबकि राज्यसभा में सर्वाधिक निर्वाचित सदस्यों की संख्या भी यूपी से 31 है।
नंबर 21 प्रथम अधिवेशन 13 मई 1952 को हुआ जबकि राज्य सभा का प्रथम अधिवेशन 13 मई 1952 को हुआ
नंबर 22 प्रधानमंत्री के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव इसी सदन में लाया जा सकता है जबकि राज्यसभा में अविश्वास प्रस्ताव प्रधानमंत्री जी के खिलाफ सभापति महोदय के समक्ष रखा जाता है।
नंबर 23 धन विधेयक लोकसभा में प्रस्तुत किए जाते हैं जबकि राज्यसभा में धन विधेयक केवल 14 दिन तक रख सकते हैं।
भारत में स्थानीय स्वशासन:-
भारत में नगरीय स्वशासन के जनक लॉर्ड रिपन को कहा जाता है भारत में चतुर्थ स्तरीय पंचायती राज्य शासन व्यवस्था का उल्लेख है।
प्राचीन काल में स्थानीय स्वशासन को दो भागों में वर्गीकृत किया गया था प्रथम नगरिया और दूसरा ग्रामीण या स्थानीय
इस समय स्थानीय स्वशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम सभा होती थी जिसका मुख्य ग्रामीण ही कहा जाता था 18 ईसवी में लॉर्ड रिपन के द्वारा स्थानीय स्वशासन हेतु प्रथम बार एक योजना प्रस्तुत की गई इस योजना को स्थानीय स्वशासन का मैग्नाकार्टा कहा जाता है।
1909 में मार्ले मिंटो सुधार के द्वारा इस योजना को प्रभावी बनाने हेतु प्रयास किए गए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन का नियंत्रण पंचायती राज द्वारा तथा नगरीय स्वशासन पर नगरीय शासन का नियंत्रण होता है।
अनुच्छेद 40 में ग्राम पंचायतों के गठन की बात महात्मा गांधी द्वारा कही गई महात्मा गांधी जी के द्वारा पंचायती राज व्यवस्था को लागू करने संबंधी सुझाव दिया गया राजस्थान में इसका शुभारंभ पंडित जवाहरलाल नेहरु के द्वारा 2 अक्टूबर 1959 को नागौर जिले के बगदरी में किया गया।
पंचायती राज व्यवस्था को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 246 एवं अनुसूची 11 में जोड़ा गया है। इनका उल्लेख संविधान के 73वें संशोधन 1992 में किया गया।
स्थानीय स्वशासन से संबंधित महत्वपूर्ण समितियां
1) बलवंत राय मेहता समिति:- 1957- 58
1957 में भारत सरकार द्वारा पंचायती राज व्यवस्था के संदर्भ में बलवंत राय मेहता समिति का गठन किया गया इसका
मुख्य उद्देश्य:- लोकतंत्रात्मक विकेंद्रीकरण एवं स्थानीय स्वशासन को सुदृढ़ करना
सुझाव:- भारत में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था को लागू करना तथा ग्राम स्तर पर विकास हेतु स्थानीय व्यक्तियों को शासन देना या संभालना।
2) अशोक मेहता समिति 1977:-
इस समिति ने पंचायती राज व्यवस्था को द्वितीय करने का सुझाव दिया। नंबर 1 मंडल स्तरीय और दूसरा जिला स्तरीय या जिला परिषद
3) राव समिति 1985:-
1985 में इस समिति ने राज्य में राज्य स्तर पर राज्य परिषद तथा छोटे स्तर पर पंचायत तथा ग्राम स्तर पर ग्राम सभा की योजना प्रस्तुत की।
भारत में वर्तमान में चार स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।
Note:- केवल पश्चिम बंगाल में 4 स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का उल्लेख है।
4) सिंघवी समिति 1986:-
इस समिति का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों की स्थिति सुदृढ़ करने हेतु वित्तीय व्यवस्था की सिफारिश करना था भारत में 1 से 4 तक थ्रो पर पंचायती राज व्यवस्था की गई है।
एक स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था भारत में निम्न राज्यों में स्थित है:- ट्रिक:- जम्मू मंत्री कैसी एक बार
जम्मू-कश्मीर मणिपुर त्रिपुरा केरल सिक्किम आदि।
द्वितीय पंचायती राज व्यवस्था:- असम कर्नाटक छत्तीसगढ़ हरियाणा और दिल्ली
त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था:- राजस्थान हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड झारखंड इत्यादि
चतुर्थ स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था:- पश्चिम बंगाल
73 वे में संविधान संशोधन की प्रमुख विशेषता:-
इसके अंतर्गत सर्वप्रथम ग्राम पंचायतों को श्वेता निक दर्जा प्राप्त हुआ इनकी वित्तीय व्यवस्था का निर्धारण करने के लिए राज्य वित्त आयोग का गठन प्रत्येक 5 वर्ष के लिए किया जाता है इसके अंतर्गत महिलाओं के आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 50% कर दी गई एवं भारत में ग्राम पंचायतों का ढांचा सुदृढ़ करने हेतु महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। राजस्थान में त्रिस्तरीय शासन व्यवस्था निम्नानुसार है:-
ग्राम पंचायत 11, 283:-
कार्यक्षेत्र:- ग्राम पंचायतों में स्थित गांव ढाणी एवं सरपंच व अन्य सदस्य
3000 जनसंख्या पर एक सरपंच तथा नौ अन्य सदस्य।
इसका सरकारी या प्रशासनिक अधिकारी ग्राम सेवक या ग्राम सचिव होता है।
शपथ:- आवश्यक नहीं है। त्यागपत्र:- उप सरपंच सरपंच और वार्ड पंच तीनों ही विकास अधिकारी को देते हैं। निर्वाचन सरपंच :- प्रत्यक्ष सदस्यों द्वारा या ग्रामीणों द्वारा उपसरपंच निर्वाचन:- अप्रत्यक्ष
बैठक:- प्रत्येक माह में दो बार एवं वर्ष में 24 बार आवश्यक बैठक 4 होती है 1 मई श्रमिक दिवस को 2 अक्टूबर गांधी जयंती पर और 26 जनवरी और 15 अगस्त
पंचायत समिति या ब्लॉक:-
कार्यक्षेत्र:- ग्राम पंचायत विधायक सांसद पंचायत समिति सदस्य एवं अध्यक्ष
इसमें एक लाख की जनसंख्या पर एक प्रमुख या प्रधान तथा 15 अन्य सदस्य होते हैं तथा प्रत्येक 15000 की जनसंख्या पर 2 सदस्य बनाए जाते हैं।
इसका अधिकारी खंड विकास अधिकारी होता है।
शपथ:- प्रधान को एसडीएम
प्रधान अपना त्यागपत्र सीईओ को देता है।
निर्वाचन:- सदस्य प्रत्यक्ष निर्वाचित होते हैं अध्यक्ष व उपाध्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से
बैठक:- प्रत्येक माह में एक बार वर्ष में 12 बार
जिला परिषद या जिला स्तर पर
प्रत्येक जिले की एक जिला परिषद होती है। कार्यक्त्र
:- पंचायत समिति जिला परिषद के सदस्य विधायक सांसद जिला प्रमुख या अध्यक्ष
इसमें एक जिला प्रमुख तथा 17 अन्य सदस्य होते हैं।
इसका प्रशासनिक अधिकारी कलेक्टर होता है। जिला प्रमुख को सफल जिला कलेक्टर के द्वारा दिलवाई जाती है। जिला प्रमुख अपना त्यागपत्र संभागीय आयुक्त को देता है।
निर्वाचन:- जिला परिषद के सभी सदस्यों का निर्वाचन प्रत्येक मतदान प्रणाली द्वारा होता है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का निर्वाचन अप्रत्यक्ष होता है।
बैठक:- 3 माह में एक बार और 1 वर्ष में चार बार होनी आवश्यक है।
नोट:- तीनों स्तरों में निम्न समानता पाई जाती है:-
ग्राम पंचायत या पंचायत समिति और जिला परिषद में निम्न समानता पाई जाती है:-
सभी सदस्यों हेतु योग्यता आयु सीमा:- 21 वर्ष न्यूनतम होनी चाहिए। आरक्षण का प्रावधान निम्न प्रकार से है:-
महिलाओं के लिए:- 50%
ओबीसी:- 21%
Ac/At:- जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का प्रावधान या निर्वाचन सक्रिय आधार पर किया जाता है जो हर 5 साल बाद बदलता रहता है।
तीनों स्तरों के लिए वित्त एवं कानून निर्माण का कार्य राज्य विधानसभा एवं विधान परिषदों द्वारा किया जाता है इनका चुनाव का दायित्व राज्य निर्वाचन आयोग का होता है।
चुनाव की अधिसूचना राज्यपाल द्वारा जारी की जाती है तथा दल बदल विरोधी कानून इन पर लागू नहीं होता है।
इनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव 2 वर्ष बाद ही लाया जा सकता है एवं पारित नहीं होने पर पुणे 1 वर्ष बाद लाया जा सकता है।
तीनों स्तरों पर सदस्यों को चुनाव प्रत्यक्ष मत प्रणाली के द्वारा होता है।
अविश्वास प्रस्ताव पारित करने हेतु तीन चौथाई बहुमत की आवश्यकता होती है।
गणपूर्ति या फोरम के लिए एक तिहाई सदस्यों की आवश्यकता होती है।
इनके मुख्य के चुनाव सरपंच को छोड़कर अन्य सदस्यों द्वारा प्रत्यक्ष तौर पर किया जाता है।
नगरीय स्वशासन व्यवस्था:-
नगरीय स्वशासन हेतु सर्वप्रथम नगर निकायों का गठन किया गया। भारत में सर्वप्रथम 1686 को मद्रास नगर निगम की स्थापना हुई। भारत में सर्वप्रथम 1807 में माउंट आबू में प्रथम नगर पालिका का गठन किया गया। एवं इसके पश्चात 2 वर्ष बाद अजमेर नगर पालिका का गठन किया गया। 1992 में सर्वप्रथम जयपुर को नगर निगम बनाया गया।
74 वें संविधान संशोधन के अंतर्गत 1993 के बाद भारतीय संविधान की अनुसूची 12 एवं भाग 9 के में नगरीय स्वशासन या नगरपालिका को जोड़ा गया। जिनके निम्न प्रकार हैं :-
1.अधिसूचित क्षेत्र:-
राज्य सरकार के द्वारा किसी अधिसूचित पत्र या सरकारी पत्र में जिस क्षेत्र की अधिसूचना जारी की गई वह नगर निकायों का गठन संबंधी प्रावधान प्रस्तुत किया गया है । मुख्य अतिथि ने ऐतिहासिक व पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण नगर में इनक गठन किया गया
राजस्थान में माउंट आबू पुष्कर आमेर एवं जैसलमेर को पर्यटन की दृष्टि से अधिसूचित क्षेत्र घोषित किया गया था जिसे 74 वें संविधान संशोधन के बाद समाप्त कर दिया गया।
2. एक उद्देश्य अभिकरण या एक कल अभिक्रमित क्षेत्र:-
इसके अंतर्गत किसी भी सदस्य को या पर्यटन को ध्यान में रखकर नगर निकायों का गठन किया जाता है उन्हें एकल उद्देश्य अभिकरण कहा जाता है ऐसे क्षेत्र तीन हैं पहला जयपुर विकास प्राधिकरण दूसरा अजमेर विकास प्राधिकरण और तीसरा जोधपुर विकास प्राधिकरण।
3. छावनी क्षेत्र:-
इस क्षेत्र के अंतर्गत सैनिक बाहुल्य वाले क्षेत्रों को शामिल कर इसका गठन किया जाता है। जिस पर भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय का सीधा नियंत्रण होता है। तथा इसके अध्यक्ष पद पर सैनिक अधिकारी की नियुक्ति की जाती है। तथा उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित अधिकारी की नियुक्ति की जाती है।
वर्तमान में राजस्थान में ऐसे क्षेत्र दो हैं:- पहला नसीराबाद अजमेर और दूसरा जैसलमेर छावनी
4. कस्बा क्षेत्र नगरपालिका:-
इसका गठन उस क्षेत्र में किया जाता है जो हाल ही में ग्राम पंचायत से नगर निकाय में परिवर्तित हुआ हो। अर्थात गांव की जनसंख्या में वृद्धि से नगरपालिका में बदल गया क्षेत्र उसे कस्बा क्षेत्र कहते हैं।
5. नगर निगम:-
इसका गठन 500000 की जनसंख्या से अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र में किया जाता है। यह महापौर या मेयर उप महापौर एवं पार्षद द्वारा संचालित क्षेत्र है।
इस क्षेत्र में उप महापौर को छोड़कर सभी सदस्यों को निर्वाचित प्रत्यक्ष तौर पर किया जाता है।
नगर आयुक्त नगर निगम का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी होता है।
नोट:- इनके अलावा अन्य व्यवस्थाएं पंचायती राज व्यवस्था के समान होती है।
6. नगर परिषद एक:-
प्रथम श्रेणी या एग्रेड वर्तमान में 100000 से 500000 तक की जनसंख्या का दायरा होता है उसे
प्रथम श्रेणी की नगर परिषद कहते हैं।
7. नगर परिषद दो या नगरपालिका:-
50000 से 100000 तक की जनसंख्या का क्षेत्र इसके अंतर्गत आता है।
8. नगर परिषद 3 या नगरपलिका
:- जिन नगरों की जनसंख्या 50000 से 25000 तक की हो इस तरह का गठन किया जाता है।
9. नगर परिषद 4 नगर पालिका:-
इसमें 25000 से कम जनसंख्या वाले नगरों को शामिल किया जाता है।
सभापति उपसभापति पार्षद स्थानीय समितियां अधिशासी अधिकारी इंका शासन चलाते हैं।
संविधान की 12 अनुसूचियां
अनुसूची 1 :- संघ एवं राज्यों का उल्लेख अनुसूची
दो:- राष्ट्रपति प्रधानमंत्री उपराष्ट्रपति राज्यपाल लोकसभा राज्यसभा में उच्चतम न्यायालय के सदस्यों का वेतन।
अनुसूची 3:- व्यवस्थापिका के सदस्यों एवं मंत्री एवं राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति एवं न्यायधीश के शपथ का उल्लेख।
अनुसूची 4:- राज्य सभा में विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में स्थानों के बंटवारे से संबंधित।
अनुसूची 5:- अनुसूचित क्षेत्रों एवं अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन से संबंधित।
अनुसूची 6:- क्विक अमित असम मेघालय त्रिपुरा एवं मिजोरम में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित।
अनुसूचित 7:- संघ राज्य तथा समवर्ती सूची ओं का उल्लेख
अनुसूची 8:- भारत की 22 भाषाओं का उल्लेख।
अनुसूची 9:- भूमि सुधार से संबंधित अधिनियम।
अनुसूची 10:- दल बदल विरोधी कानून या निरोधक कानून।
अनुसूची 11:- पंचायती राज से संबंधित।
अनुसूची 12 विवरण नगर पालिका एवं नगरीय प्रशासन से संबंधित।
नोट:- 11 व 12 वीं अनुसूची कर्म 77 वे एवं चेत्र वे संविधान संशोधन अधिनियम कर्म से 1993 व 1994 में जोड़ी गई।
भारतीय संविधान में निम्न प्रावधान है निम्न देशों से लिए गए :-
ई विकास रा मंत्र:- इंग्लैंड से
1 इकहरी नागरिकता नंबर दो विधि का शासन नंबर 3 कानून निर्माण प्रक्रिया नंबर 4 राष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति नंबर 5 मंत्री परिषद यह सभी इंग्लैंड के संविधान से लिया गया है।
अन्याय की पुन: उपमा लो:- अमेरिका से
नंबर एक मूल अधिकार नंबर दो न्याय प्रक्रिया नंबर 3 पुन:
अवलोकन नंबर 4 उपराष्ट्रपति की संवैधानिक स्थिति नंबर 5 महाभियोग प्रक्रिया नंबर 6 लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था
संघात्मक शासन व्यवस्था कनाडा से या संघ का नाडा
निया आज सद समास को गफा करूं
आपातकालीन व्यवस्था :- जर्मनी से संशोधन प्रक्रिया :- दक्षिण अफ्रीका से। समवर्ती सूची:- ऑस्ट्रेलिया से। गणतंत्र आत्मक व्यवस्था:- फ्रांस से। कर्तव्य:- रूस से
भारत के राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह एवं भाषा
भारत का राष्ट्रीय पशु:- टाइगर
भारत का राष्ट्रीय पक्षी:- मयूर
भारत का राष्ट्रीय फल:- आम
भारत का राष्ट्रीय पुष्प :- कमल
भारत का राष्ट्रीय पेड़ :-बरगद
भारत के राष्ट्रपिता:- महात्मा गांधी
भारत के राष्ट्रीय ध्वज का नाम :- तिरंगा
भारत का राष्ट्रीय खेल:- हॉकी
भारत का राष्ट्रीय गान :- जन गण मन
राष्ट्रीय कैलेंडर:- शक संवत।
भारतीय राष्ट्रीय नदी:- गंगा नदी
भारत की राजभाषा :- हिंदी
भारत का राष्ट्रीय अवतार:- भारत माता
प्रमुख संवैधानिक अनुच्छेद
यह घोषणा करता है कि भारत राज्यों का संघ है:- अनुच्छेद 1
संसद विधि द्वारा नए राज्य बना सकती है तथा पहले मौजूद राज्यों के क्षेत्रों सीमाओं नामों में परिवर्तन कर सकती है:- अनुच्छेद 3
नागरिकता का प्रावधान:- अनुच्छेद 5 से 11
मौलिक अधिकारों का प्रावधान:- अनुच्छेद 12 से 35
राज्य के नीति निदेशक तत्व:- अनुच्छेद 36 से 51 मौलिक
कर्तव्य:- अनुच्छेद 51 के क
संविधान के किस अनुच्छेद में संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग का प्रावधान है:- अनुच्छेद 315
किस अनुच्छेद के अंतर्गत हिंदी भाषा को राजकीय भाषा घोषित किया जाता है:- अनुच्छेद 346 1
संविधान की किस अनुच्छेद के तहत अनुसूचित जनजातियों के लिए एक राष्ट्रीय आयोग के गठन का प्रावधान है:- अनुच्छेद 338 ए
संसद की संविधान संशोधन का अधिकार किस अनुच्छेद में है:- अनुच्छेद 368
संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत संविधान की प्रक्रिया का उल्लेख है अनुच्छेद:- अनुच्छेद 356
संविधान के किस अनुच्छेद में मंत्रिमंडल शब्द का प्रयोग संविधान में एक बार हुआ है:- अनुच्छेद 352
जम्मू कश्मीर को किस अनुच्छेद के अंतर्गत विशेष दर्जा प्राप्त है:- 370 अनुच्छेद 356 का संबंध किससे है:- राष्ट्रपति शासन से
भारतीय संविधान में समानता का अधिकार 5 अनुच्छेद द्वारा प्रदान किया गया है वह कौन से हैं:- अनुच्छेद 14 से 18
संविधान के किस अनुच्छेद में मूल कर्तव्यों का उल्लेख है:- अनुच्छेद 51 के क
भारतीय संविधान के नागरिक का कर्तव्य होगा प्राकृतिक पर्यावरण का संरक्षण एवं सुधार यह कथन किस अनुच्छेद में है:- अनुच्छेद 48 ए
संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत है राज्य सरकार को ग्राम पंचायत के संगठन का निर्देश दिया गया है:- अनुच्छेद 40
वर्तमान में संविधान में कितनी अनुसूचियां हैं:- 12
सविधान की द्वितीय अनुसूची का संबंध किससे है:- महत्वपूर्ण पदाधिकारियों के वेतन भत्तों से
कौन सी अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई है:- आठवीं अनुसूची
दल बदल के आधार पर निर्वाचित सदस्यों की योग्यता संबंधी विवरण किस अनुसूची में है:- अनुसूची 10
सविधान की छठी अनुसूची किस राज्य में लागू नहीं होता है:- मणिपुर
किस राज्य के आरक्षण विधेयक को अनुसूची में सम्मिलित किया गया है:- तमिलनाडु
भारतीय संविधान की कौन सी अनुसूची राज्य में नामों की सूची तथा राज्य क्षेत्रों का दौरा देती है:- पहली अनुसूची
भारतीय संविधान की अनुसूची परिवर्तित हुई:- प्रथम संशोधन द्वारा
किस अनुच्छेद के अंतर्गत उपराष्ट्रपति पद की व्यवस्था है अनुच्छेद 63
वित्तीय आपात की घोषणा किस अनुच्छेद के अंतर्गत होती है:- 360
अनुच्छेद 370 किस राज्य से संबंधित है:- जम्मू कश्मीर राज्य के संबंध में अस्थाई उपबंध
नौकरियों तथा शैक्षणिक संस्थाओं में समाज के कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार को कौन सा अनुच्छेद अधिकार प्रदान करता है अनुच्छेद:- 16
संविधान के किस अनुच्छेद में राज्य में लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा वर्णित है :- अनुच्छेद विवरण 39
संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत भारत में राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाया जा सकता है:- अनुच्छेद 61
किस अनुच्छेद में मंत्रियों ने सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदाई होते हैं अनुच्छेद 75
महान्यायवादी की नियुक्ति किस अनुच्छेद के अंतर्गत की जाती है :- अनुच्छेद 76
संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत से राष्ट्रपति लोकसभा को भंग कर सकता है:- अनुच्छेद 85
किस अनुच्छेद में संसद के संयुक्त अधिवेशन का प्रावधान है:- अनुच्छेद 108
सविधान के किस अनुच्छेद में धन विधेयक की परिभाषा दी गई है अनुच्छेद 110
अनुच्छेद के अंतर्गत राष्ट्रपति अध्यादेश जारी कर सकता है:- अनुच्छेद 123
किस अनुच्छेद के अंतर्गत केंद्र के पास अवशिष्ट शक्तियां हैं:- अनुच्छेद 248
किस अनुच्छेद में अंतरराष्ट्रीय समझौते लागू करने के लिए शक्ति प्रदान की गई है:- अनुच्छेद 253
किस अनुच्छेद के तहत राष्ट्रपति वित्त आयोग का गठन करता है:- अनुच्छेद 280
संपत्ति का अधिकार किस अनुच्छेद में है:- अनुच्छेद 300 क
प्रस्तावना की भाषा किस देश से ली गई है:- ऑस्ट्रेलिया
सविधान का मैग्नाकार्टा किसे कहा जाता है:- मौलिक अधिकार
जनता के प्रति विधायिका और कार्यपालिका की शक्तियों को मर्यादित कौन करता है:- मौलिक अधिकार
संविधान का कौन सा अनुच्छेद भारतीय नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करता है:- अनुच्छेद 12 से 35
मूल अधिकारों का प्रारूप किसने बनाया था:- पंडित जवाहरलाल नेहरू
अधिकारों की मांग किसने और कब की थी सन 1931 में कांग्रेस के कराची अधिवेशन में अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल ने घोषणापत्र में मूल अधिकारों की मांग की थी
जब संविधान बना तब भारत के नागरिकों को कितने मौलिक अधिकार मिले हुए थे:- 7
वर्तमान में संविधान भारत के नागरिकों को कितने मौलिक अधिकार देता है:- 6
प्रतियोगी परीक्षाओं में political या राजनीति से पूछे गए महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर-UPSC, SSC, CLG, CHAL, MTS, POLICE, ARMY, RAILWAY, BANK, LDC, 1ST GRAD, REET, UPPCS, RAS, IAS , IPS, CLAT,CDS, S. I., NAVY, AIRFORCE, Rajasthan police ,bstc, lab assistant, etc.